सभी को नमस्कार , उम्मीद करता हूँ विद्यार्थियों द्वारा अपने आप को घरों में सुरक्षित रखकर स्वयं कुछ न कुछ अध्य्य्यन कार्य जारी रखा जा रहा होगा। ये सच है कोरोना के कारण सैकड़ों परिवारों ने अपने परिजनों को खो दिया है उन पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा पर प्रकृति का चक्र अनवरत चलता रहता है ।
कक्षा 9 वीं व 11 वीं के विद्यार्थियों को उनके रिवीजन टेस्ट व अर्द्ध वार्षिक परीक्षा में प्राप्त अंको के आधार पर पास किया जा रहा है , जिनोन्हे टेस्ट नही दिया उंन्हे अवसर प्राप्त हो रहा है , पढ़ने को सब मटेरियल आपके पास होगा। हमारे इस ब्लॉग पर भी कक्षा 9 वीं 10 वीं 11 वीं व 12 वीं का सभी मटेरियल उपलब्ध है आप कभी भी डाऊनलोड कर पढ़ सकते हैं। इसके अलावा भी आप हमारे ब्लॉग को नियमित पढ़ते रहें कुछ न कुछ उपयोगी आपके लिए अवश्य लाएंगे।
वर्तमान में मैं भी कोरोना से भयंकर रूप से ग्रसित होकर जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा हूँ 9 वें दिन मुझे घर से आखिरकार , भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में शिफ्ट होना पड़ा। इसके लिए कमिश्नर मेडम का आभार जिनके कारण एडमिट हो सका।
एडमिट के वक्त हालत बहुत खराब थे , बहुत फीवर ,सांस लेने में दिक्कत , पर हॉस्पिटल ने 1 घण्टे में ही ट्रीटमेन्ट सुरु किया , 2 बॉटल लगाई गई। जो रात 2 बजे तक चढ़ती रही।
3 tblet खाने को दी गई
अगले दिन सुबह फीवर नही था पर सुबह 11 बजे फिर से 1 bottl ड्रिप चढ़ाई गई साथ मे 2 इंजेक्शन दिए गए।
सुबह का नाश्ता
2 अंडे, 2 अमूल 100 ml मिल्क, 1 केला ,1 सेव, थोड़ा पोहा। (आप बीमार है घर पर है तो ये सब जरूर खाएं। अंडे से परहेज न करें )
दिन में 2 बजे लंच
4 रोटी, 1 दाल, 1 सब्जी, चावल। 1 स्वीट
दिन में खाने के बाद 3 tblet दिए गए।
रात में खाना 8 बजे
4 रोटी ,1 दाल,1 सब्जी, चावल , 1 स्वीट
खाने के बाद फिर से 3 tblet दिए।
अगले दिन यानी हॉस्पिटल में तीसरे दिन सुबह
पहला रेमडीसीवीर इंजेक्शन ,,बोटल में ड्रिप के साथ दिया साथ ही नस में 2 इंजेक्शन भी लगाए।
सुबह का नाश्ता, दोपहर न रात का भोजन पूर्वनुसार
दिन में 3 tblet ,,,,इन सबके बाद फीवर नही आया
हॉस्पिटल के चौथे दिन ,,,फिर से रेमिडीसीवीर ,,का दूसरा डोज दिया गया। 2 इंजेक्शन नस में दिए गए।
फेफड़ो में दर्द बना रहा ,पर कुछ राहत के साथ।
हॉस्पिटल में 5 वां दिन आज तीसरा रेमिडिसवीर इंजेक्शन दिया गया ,इसके पूर्व कंधे में एक इंजेक्शन लगाया गया।
फेफड़ो में कुछ दर्द कम हुआ। फीवर नही है , किन्तु हालत स्थिर बनी हुई है ।
13 दिन हो चुके है ,,बस इतना है oxygen न घर पर लगी थी ,और न ही अब तक 5 दिन में हॉस्पिटल में ही लगी । जबकि वार्ड में भर्ती सभी 37 मरीज 24 घण्टे ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही चल रहे है।
जिन्दगी और मौत के घटते फान्सलों के बीच निजी जीवन के कुछ अनछुए पहलूँ --
कोरोना की खरतनाक लहर के बीच यूं तो सैकड़ों लोगो को असमय जीवन छोड़ना पढ़ा किन्तु अनन्य मित्र सचिन गुप्ता और बैतूल से साथी घनश्याम महतकर की मौत ने अंदर तक हिला डाला पहली बार महसूस हुवा आपका जीवन भी कभी भी खत्म हो सकता है .
हमीदिया हॉस्पिटल की 6 छठवीं मंजिल पर मेरे साथ 37 अन्य कोरोना पीड़ित भी भर्ती थे जहाँ सर से लेकर पैर तक सफ़ेद पाली बैग में पैक नर्स / अन्य हेत्ल्थ स्टाफ व् कभी कभी राउंड पर आने वाले डॉक्टर के आलावा हर वक्त मौत की निःशब्द खामोशी छाई रहती थी , मेरा शरीर तो ठीक था पर फेंफडों में असहनीय दर्द था , टायलेट जाने के 50-60 फीट दूर के रास्ते हो भी एक दो बार बैठकर ही पूरा कर पा रहा था . सुबह से शाम रात और फिर सुबह बस यही चक्र था . तारीखों और दिन का हिसाब भी धीरे धीरे खत्म सा हो रहा था .
हॉस्पिटल की 6छठवीं मंजिल की खिड़की से रात 2-3 बजे जाकर बाहर भोपाल की झील और उसमें पड़ने वाली रंग विरंगी रोशनी दिल में थोड़ी सी आशा भरती वहीं दूसरे पल ये लगता कहीं मैं न रहा तो -----------------------? फिर बेटे की याद आती ईश्वर को याद कर कहता भगवान थोड़ा सा साथ और दे दों अभी वो बहुत छोटा है क्योंकि किसी और को शायद मेरी जरूरत न हो पर उसे जरूर होगी . माता पिता भी निश्चित ही दुखीं होंगे पर ये सोचता , छोटा भाई है न . पत्नी का साथ कभी समझ नहीं आया . मेरे साथ खुश है कि दुखी है प्रेम जैसा तो दूर दूर तक नहीं दिखा . उसे मेरी जरूरत भले ही हो या न हो पर उसके लिए ये लगता उसके पास बेटा है, छोटा भाई है उसके सहारे उसका जीवन चल जाएगा .
यूं तो मेरे बहुत कम अनन्य मित्र हैं पर वो हर वक्त याद करते और चिंतिति होने पर फ़ोन करते , पर फेंफडों के दर्द के कारण थोड़ी ही बात कर पाता और फिर अकेला हो जाता . होस्पिटल में भर्ती हुए कई दिन हो गए थे पर फेफड़ों का दर्द अब भी कम नहीं था . समय के साथ लगने लगा कि पता नहीं जीवन बचेगा या नहीं. शायद मेरा जीवन किसी के काम का नहीं है. फिर लगता कि उन हज़ारो स्टूडेंट्स के काम का हो सकता है जो बहुत बेसब्री से मेरी शैक्षणिक पोस्ट / स्टडी मटेरियल को पढ़ते बड़ी संख्या में उनके मेसेज आते कि सर हिंदी का भेज दो , सर केमिस्ट्री का भेज दो . सर आपका स्टडी मटेरियल बहुत काम का प्लीज इसे भेज दो .
अब जीवन के उस पहलू पर चर्चा जो होती तो सबके जीवन में है , पर शेयर शायद ही कोई करता हो ----
रात 2-3 बजे जब नींद न आती तो बचपन से अब तक का अतीत का पूरा जीवन आँखों के सामने घूमने लगता . दिल के किसी कोने में वो मुझे वो चाहने वाली भी घूम जाती जिनकी चाहतों को मैंने कालेज / यूनिवर्सिटी / और कार्यक्षेत्र में ठुकराया. लगता जैसे उनकी बद्द्दुवों से ही बीमार हो गया .पर उन्हें क्या बताता मेरा जीवन उनके लिए कभी नहीं हो सकता था . आपकी चाहतों का सम्मान है पर मेरा प्रेम किसी के शरीर के लिए इतना अंधा नहीं हो सकता था कि मैं उनके साथ अपने आप को शेयर करूं . और सच कहूं मुझे पता नहीं क्यों फीमेल्स के लिए यही लगता रहा कि कि वो शरीर की जरूरत पूरी होने तक ही प्रेम कर सकती है . आगे वो कब कहाँ साथ साथ छोड़ दें कह नहीं सकता . ऐसा भी हो सकता है हमें ऐसे ही चाहने वाली मिली हों . पर शायद ऐसा कोई मीटर या पैमाना बना होता है जिससे नाप लेता कि कौन वास्तव में प्रेम करता था तो अवश्य कोई न कोई पार्टनर बना लेता . पर अब तक इन सबसे दूरी बनी रही तो आगे अब दूर दूर तक ऐसी कोई संभावना नहीं कि कि आपके दिल पर कोई दस्तक दें और आप उसे चाहने लगे. क्योंकि मुझ जैसे के लिए शरीर की कोई चाहत नहीं पर दिल का पार्टनर जब पत्नी न बन सकी तो दुनियां में अब शायद मिलना नामुमकिन हैं .
शाहजंहाँ ने कई शादियाँ की पर सबसे ज्यादा प्रेम मुमताज से हो सका . शरीर सबसे मिला होगा . पर प्रेम हुवा किसी एक से ही . शादी होने पर पत्नी से शरीर मिलता है पर उसे आपसे प्रेम हो या आपको उससे प्रेम हो ये कोई आवश्यक नहीं . पर जहाँ दोनों हो उनका जीवन स्वर्ग होता है . शरीर को चाहने वाला प्रेम ज्यादा दिन नहीं चल सकता है . पर दिल से प्रेम करने वाले अमर हो सकते हैं .
जीवन और मौत के इस संघर्ष में यदि मैं जीता तो मेरी प्राथमिकताएं अब पूरी तरह बदली होंगी ...
1. स्टूडेंट्स के लिए अंतिम सांस तक जब तक संभव है कुछ न कुछ करता रहूँगा . यही कारण हैं रात 2 बजे भी पोस्ट करता रहता हूँ .
2. विभाग और टीचर्स के लिए अपना बहुत कुछ दाव पर लगाकर काम करता हूँ अब इसमें कमी करूंगा , काम कर सकता हूँ पर अपना सब कुछ दाव पर लगाकर नहीं . दुनियां में मेरे होने न होने से किसी को को फर्क नहीं पड़ने वाला .
3. पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन अपनी ड्यूटी मानकर करूंगा . अब तक बहुत कुछ इग्नोर कर देता था .
4. माता -पिता , पुत्र , बंधू बांधव , और मित्रों के लिए लिए भी जो संभव हो सकेगा करूंगा.
5. किसी भी जरूरत मंद द्वारा दरवाजा खटखटाने पर उसकी मदद अवश्य करूंगा . किसी का कार्य होने पर न पहले एहसान मानने के लिए लिए कहा और न ही आगे कहूँगा .
6. बहुत रोचक किसी की चाहतों को ठुकराकर अब बद्दुआओं को नहीं लेना चाहूँगा ( हा ---हा हा ) . कालेज /यूनिवर्सिटी / कार्यक्षेत्र में अब अब तक कोई ऐसा नहीं मिला जिसे मैं चाहूं , तो अब अब आगे भी कोई नहीं मिलेगा ये तय है . पर अपने मन की लिखना चाहता था सो लिख दिया .
( आगे यदि जीवन रहा रहा तो ये पोस्ट डिलीट करूंगा और पर आपका हमारा साथ छूट गया तो ये पोस्ट आप सभी पढ़ते रहना . पर मित्रों , पत्नी , बंच्चों से यही कहना चाहूंगा मैं बुरा नहीं हूँ . आप सभी बहुत अच्छे हैं . जीवन में कभी किसी से प्रोमिस नहीं करना , यदि करो तो निभाने की पूरी कोसिस करना . मेहनत से पढों लिखो , नौकरी करो खूब काम करों, पर अपने लिए भी थोडा सा समय जरूर निकलना . झूठी शान - और दिखावे से दूर रहना. जीवन में किसी को कभी धोखा नहीं देना चाहे पुरुष हो या लडकी /महिला . आगे साथ रहा तो आपका सहयोग करता रहूँगा ) 26 अप्रैल 2021
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चलिए अब भावनावों के ज्वार से बाहर निकल कर फिर रियल जिन्दगी में हॉस्पिटल में आता हूँ ----------------
नोट,,,, यहाँ डॉक्टर ने किसी को भाप नही दी। हालांकि घर पर लेने को वो मना भी नही करते पर हॉस्पिटल में किसी को भी नही दी।
हमीदिया सरकारी हॉस्पिटल है यहाँ , भर्ती होना कठिन पर मेडिकल की सभी सुविधाएं उपलब्ध है।
आप सभी से 2 अनुरोध,,,,1,नास्ता व खाना बहुत प्रोटीन व फल, व दूध युक्त ही लें सेव केला अंडा व दूध भ्ररपूर ले हर हाल में।
2 जहाँ भी सोए ,,ठंडा व हवादार मौसम रखें
3 यदि कोई बोटल चढ़ा सकता है ,तो जरूर चडवा लें बॉडी जल्दी कूल होगी।
4 फोन पर बातचीत ,,न के बराबर करें
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कोरोना से मेरी जंग जारी है ,साथ रहा तो उपयोगी शैक्षणिक ,पठन पाठन सम्बन्धी पूर्ण प्रामादिक व उपयोगी जानकारी सतत रूप से आप सभी मिलती रहेगी। ,,इसके लिए हमारे ब्लॉग को नियमित चेक करते रहे व पढ़ते रहें ।


2 टिप्पणियाँ
सर आप जल्दी ही स्वस्थ होकर घर आएंगे ओर सभी कार्य पहले जैसे ही आपके मार्गदर्शन में हम करेंगे।
जवाब देंहटाएंGood evening sir 🙏आपका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमारी हिम्मत है,,और मुझ जैसे सेकड़ो शिक्षक आपके मार्गदर्शन मे सही निर्णय ले कर अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभा पा रहे है राम कृपा से आप जल्दी ही पूरी तरह स्वस्थ हो कर घर आयेंगे और हमारा सतत् मार्गदर्शन करेंगे। जो सबको हिम्मत दे उसे कोई नही हरा सकता। हमारे शुभ कर्मो के फल मे ईश्वर कुछ दें तो बस आपका स्वास्थ जल्दी ठीक कर दे यही प्रार्थना है। 🙏
जवाब देंहटाएंकमेंट करने के लिए आपका धन्यवाद