सभी को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
दोस्तों यूँ तो बड़ी संख्या में आप सभी हमारे शैक्षणिक ,पठन पाठन व परीक्षा उपयोगी सामग्री व अन्य शैक्षिक परिवर्तनों को जानने के लिए हमारे ब्लॉग/साइट के नियमित पाठक हैं किंतु आज के इस लेख में मैं आप सभी पूरी ,,दुनियां में मानव जीवन के लिए खतरा बन चुकी महामारी "कोरोना"के घातक असर साथ ही निजी अस्पतालों में आम आदमी द्वारा इलाज तक न करा पाने की वेवशी के बारे में बताने जा रहा हूँ। साथ ही लेख को अंत तक पढ़ने पर आप जान सकेंगे कि कोरोना से कैसे बचाव करें ,हो जाय तो क्या करें साथ ही यदि आप स्वस्थ है , और घर मे बन्द है तो समय का सही उपयोग कैसे करें
पहला दिन -रोज की तरह 12 अप्रैल को (2 दिन के अवकाश के बाद आफिस गया) इसके पूर्व दिनांक 8 अप्रैल को कोविशिल्ड वैक्सीन लगवाई थी। जिसका साइड इफ़ेक्ट शरीर में दर्द ,टूटन, व पेट मे हल्के दर्द के रूप में 2 दिन से महसूस कर रहा था। खैर 12 अप्रैल को सुबह से शाम तक दैनिक कार्यों को किया किंतु शरीर किसी भी हाल में अच्छा महसूस नही कर रहा था ,हमने सम्पूर्ण lockdown में भी 10 से 12 घण्टे कार्य किया पर पहली बार लगा कुछ गड़बड़ होने वाला है सो अक़्सर शाम 7.30 तक ऑफिस में रहने के बजाय शाम 5.30 पर ही घर चला आया , अब तक शरीर की टूटन तेज हो गई थी और हमे थोड़ा ताप भी महसूस हो रहा था। पर चाय पीने के अलावा कोई भी दवा न तो ली गई और न ही घर मे उपलब्ध ही थी। कोरोना के आने वाले भयानक हमले से अनजान रात्रि के हल्के भोजन के बाद 1,2 घण्टे कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों के लिये उपयोगी शैक्षणिक सामग्री तैयार कर रात्री 12.30 पर सोने के लिए विस्तर पर चला गया।
दूसरा दिन - 13 अप्रैल -अमूमन हम सुबह देर में जागते है पर रातभर की बैचनी के बीच सुबह 6 बजे ही उठ गया सर बहुत भारी ,व थकान महसूस होने के साथ साथ फीवर भी स्पस्ट रूप से महसूस होने लगा। चाय के स्वाद में कड़वेपन ने बीमार होने के सुरुआती संकेत दे दिए । संयोग से बुखार नापने हेतु थर्मामीटर उपलब्ध था
जिससे शरीर का ताप लेने पर 100.5 फारेनहाइट दर्ज हुवा। परंतु ये तो सिर्फ सुरुआती आहट भर थी असली दर्द का अहसास तो शीघ्र होने वाला था। दोपहर में कुछ जानकर मित्रो से पताकर पैरासिटामॉल 650 mg, व अज़ीथ्रो माईसिन टेबलेट मंगाकर तत्काल पहला डोज लिया। किंतु उससे कोई फर्क पड़ना तो दूर उलट शाम 6 बजे शरीर का तापमान 102 फारेनहाइट तक पहुंच गया। इसबीच दिन में केवल 1 या 2 ग्लास पानी पिया व रात्रि में महज 1 रोटी खाकर पुनः डोलो (पैरासिटामॉल)650 mg व एंटीबायोटिक एक टेबलेट ली। किंतु इससे भी कोई खास राहत नही मिली केवल रात्रि 2 बजे शरीर का तापमान 99.5फारेनहाइट आया। जैसे तैसे सुबह हुई।
तीसरा दिन-14 अप्रैल - अब तक स्वास्थ्य में सुधार जैसे
संकेत दूर दूर तक नजर नहीं आ रहे थे इसके उलट अपने 1,2 दो अच्छे मित्रों की कोरोना से मृत्यु के समाचार ने मन को तमाम कुशंकावों से भर दिया। कोरोना में ऑक्सिजन लेवल के महत्व को देखते हुए आज दिन में 700 रुपये का एक ओक्सिमीटर खरीदा। जिसमें शरीर मे ऑक्सिजन लेवल व पल्स को डिजिटल रूप में पढ़ा जा सकता है।
उंगली में लगाकर चेक करने पर प्रथम बार मे O2 लेवल 98 व पल्स 82 दिखाई देने पर मन को थोड़ा हौंसला प्राप्त हुवा । किंतु अब तक किसी डॉक्टर को न दिखाने की गलती कर रहा था। शाम 7 बजे शरीर का तापमान 102.2 फारेनहाइट पहुँच गया साथ ही बेचैनी भी बहुत बढ़ गई जिसे कम करने 650 mg पैरासिटामॉल व 1 एंटीबायोटिक पुनः लिया। आज दिन भर में 1 कप दूध के अलावा शरीर में कुछ भी नहीं गया । कुछ भी न खाना ये दूसरी बड़ी गलती थी जो मेरे द्वारा की जा रही थी। पूरी रात 100 से अधिक तापमान के साथ बेचैनी से गुजरी।
चौथा दिन 15 अप्रैल -सुबह से ही शरीर का ताप 100 फारेनहाइट से अधिक था सुबह आधा कप दूध के साथ 650 mg पैरासिटामॉल व 1 एंटीबायोटिक से खुद का इलाज करने की गलती फिर दोहराई जिसका खमियाजा मैं भुगतने वाला था। शाम 5 बजे तक हालत में कोई सुधार नही हुवा। सिवाय इसके कि ऑक्सीजन लेवल 97 के आसपास स्थिर बना हुवा था।
शाम 5 बजे पुनः उक्त दोनों टेबलेट दूध के साथ ली। किंतु पूरी रात न केवल तापमान 101 से अधिक रहा रात भर केवल बैचैनी से बिताई।
पांचवा दिन 16 अप्रैल -(मृत्यु तुल्य कष्ट का दिन)- पाँच दिन में केवल 1 रोटी के सिवा कुछ न खाना , अब तक किसी डॉक्टर को न दिखाना व अब तक 10 से अधिक, 650 mg की टेबलेट खाना इन सब मे सुबह से ही 102 फारेनहाइट के अधिक तापमान के साथ पूरे दिन अर्द्ध मूर्छित बनाये रखा शाम से ही एक भयानक बेचैनी और घबराहट से ये लगने लगा कि शायद आज की रात मेरे जीवन की अंतिम रात हो , इस रात बैठकर कभी लेटकर अत्यंत कष्ट में गुजारी रात्रि में शरीर का तापमान 104.6 फारेनहाइट था जो मेरे जीवन मे अब तक का सबसे ज्यादा था। कोई दवा असर नहीं कर रही थी,ऐसे में पानी की पट्टी के सहारे तापमान को रातभर कम करता रहा सुबह चेकअप कराकर अस्पताल में भर्ती होने का निर्णय लिया।
6 वां दिन 17 अप्रैल -सुबह एक परिचित की मदद से aiims हॉस्पिटल गया जहाँ इतने अधिक मरीज थे कि सहयोग के विना मेरा दिन भर टेस्ट ही नही हो पाता ,जैसे तैसे कोविड टेस्ट सैम्पल दिया कमजोरी इतनी अधिक थी लाइन में न तो खड़ा हो पा रहा था न ही बैठ पा रहा था कई घण्टे बेंच पर लेटने के बाद जैसे तैसे सैम्पल दिया। किन्तु संबंधितों द्वारा मोबाइल नंबर गलत डाल देने से समय पर रिपोर्ट की सूचना मिल पाना भी सम्भव नही रहा। खैर आज दिन में पानी का स्वाद खराब लगने पर भी पानी पीने की मात्रा बढ़ा दी। आज अपने स्वास्थ्य खराब होने की सूचना सभी को देने का निर्णय लिया लिहाजा कुछ पारिवारिक मित्रों को sms व व्हट्स एप्प से सूचना दी। भोपाल स्थित बड़े भाई समान मित्र महोदय ने अगले दिवस् कोविड टेस्ट करा कर अविलंब डॉक्टर की सलाह से इलाज को कहा । मेरे द्वारा खड़े भी न हो पाने की बात बताने पर उनोन्हे स्वयं आने की बात कही।
शाम 5 बजे उनोन्हे आकर भोपाल के नेशनल हॉस्पिटल में रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया जिसकी रिपोर्ट पोसिटिव प्राप्त हुई। इसके पश्चात ct स्कैन कराने पर फेंफड़ों में 25 प्रतिशत संक्रमण पाया गया। डॉक्टर ने पुनः चेकअप कर 5 दिन की दवा लिखी 2 दिवस में आराम न मिलने पर भर्ती होने की सलाह दी। अभी भर्ती कर लेने पर बेड नही होने की बात कही। भर्ती चार्ज सुनकर पैरों तले जमीन खिसक गई ,डॉक्टर द्वारा 70 से 80 हज़ार प्रतिदिन का खर्च बताया गया साथ ही एडवांस में 1.5लाख तत्काल जमा करने को कहा। ऐसे में होम इसोलेट रहने के अलावा कोई ऑप्शन न था। खैर रात्रि को डॉक्टर के द्वारा दिये डोज से कुछ लाभ नजर आया आज 6 वीं रात को 4 घण्टे सो सका ।बुखार भी 102 तक आ पाया।
7 वां दिन 18 अप्रैल -आज सुबह कुछ ठीक लग रहा था कारण फीवर 101 के आसपास रहा। सुबह डॉक्टर की डोज फिर ली तो दिन भर तापमान 100 के आसपास तक रहा । ऑक्सिजन लेवल अब तक 96 से 98 के बीच चलता रहा ।रात्रि में भी यही डोज लिया किन्तु अब तक खाने में थोड़ा सुधार किया 2 रोटी या पराठे ,दूध , संतरा ,मौसमी आदि को लेने से कुछ राहत महसूस हो रही थी।
8 वां दिन 19 अप्रैल- आज सुबह 8 दिन में पहली बार तापमान 100 से कम था ऐसे में आज गत 3 दिन बाद दूसरी बार नहाया । दिन में 3 नारियल पानी 2 गिलास दूध कुछ फल खाने से शरीर मे थोड़ी सी जान महसूस होने लगी। ऐसे में कोविड की वास्तविक अनुभवों को आप सभी को शेयर करने के लिए एक पोस्ट लिखने का निर्णय लिया।
9 वां दिन 20 अप्रैल -आज रामनवमी को ईश्वर स्मरण से दिन शुरू हुवा । इतने दिवस में आज पहला दिन था जबकि सिर्फ एक बार फीवर 100 तक गया इसके पश्चात ,सामान्य 98.6 बना रहा। किन्तु सांस लेने में तकलीफ व थोड़ा सा भी चलने पर घबराहट अब भी बनी हुई है । साथ ही अब तक खांसी की कोई समस्या नही थी किन्तु अब तेज खांसी हर 1 या 2 घण्टे में आने लगी है। पांचवे दिन के मुकाबले स्थिति बेहतर खतरे से बाहर नही है। आज 9 वें दिन भी कोरोना से जिंदगी और मौत के बीच की हमारी जंग जारी है , इस बीच हमारे कई दूर के मित्रों को कोरोना ने हमसे छीन लिया वही हमारा जीवन हमारे मित्रों के कारण ही अब तक बना हुवा है आगे पता नही क्या?
नोट-आप सभी की जानकारी के लिए बता दूं मुझे bp सुगर , हार्ट आदि की कोई समस्या नही है । अब वो दवाएं आपको बता रहा हूँ जो नेशनल हॉस्पिटल भोपाल के डॉक्टर द्वारा लिखी गई है
1. Lecovtet M
2.Goog flow
3.Shelcal
4.doxolin
5.Ceftum
6.Medrol
इसके अलावा डॉक्टर द्वारा एक नेबुलाइजर (भाप मशीन) लेने की सलाह दी गई
किन्तु इसके स्थान पर आपको 300 से 400 रुपये में आने वाली भाप मशीन की सलाह दूंगा ये 1300 रुपये में आई और कोई उपयोगी नही रही
फीवर की कोई टेबलेट अलग से लिखी न होने के बाद भी मित्र की सलाह पर कार्पोल (पैरासिटामॉल) हर 6 घण्टे में पृथक से ली जा रही है।
बात करते है खर्च की ,-तो होम इसोलेट होने के बाद भी अब तक 18000 रुपये के आसपास खर्च हुए है
ठीक नही हूँ पर जीवन की उम्मीद कायम है।
आप सभी को सलाह-
1.प्रथम दिवस फीवर आने पर भी तुरन्त कोविड जांच करावे ये जीवन बचाने का पहला कदम होगा।
2.मुंह का स्वाद व शरीर का ताप कैसा भी हो शरीर मे भोजन व पानी की कमी कदापि न होने दें
3.डॉक्टर की सलाह से ही तत्काल दवाइयों का सेवन करें
4.अपने परिवार और मित्रों को अपनी बीमारी के बारे में तत्काल बतावें
5. हौंसला बनाये रखें व नकारात्मक खबरे न पढ़ें ,न देखें
6.जब भी शरीर साथ दे थोड़ा सा टहलें
7. पीठ के बल सीधे सोने के बजाय करवट लेकर सोने का प्रयास करें ।
8.घर मे ऑक्सिमेटर व थरमामीटर अवश्य रखें ।
9 होम isolet होने पर अन्य सदस्यों से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें।
10 बीमारी में पैसा खर्च होता है ,परिवार ,मित्रों से सहयोग मांगने में संकोच न करें जिसके पास होगा वो अवश्य सहयोग करेगा।
,,अंत में जान है तो जहान है इसे बचाने का पूरा प्रयास करें शेष प्रभु इच्छा।
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